रिपोर्ट: CAG रिपोर्ट में बिहार सरकार के खर्च और योजनाओं पर गंभीर सवाल
पटना | विशेष रिपोर्ट | TeacherNama
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में बिहार सरकार के वित्तीय प्रबंधन और कई विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में सरकार अपने स्वीकृत बजट का बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं कर सकी, जबकि कई परियोजनाओं में भारी राशि खर्च होने के बावजूद अपेक्षित लाभ आम जनता तक नहीं पहुंचा।
प्रमुख बातें
1. ₹62 हजार करोड़ से अधिक राशि का उपयोग नहीं
वित्तीय वर्ष 2024-25 में बिहार सरकार ने लगभग ₹3.64 लाख करोड़ का बजट प्रस्तुत किया था। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें से लगभग 21% यानी करीब ₹77,340 करोड़ राशि खर्च नहीं हो सकी।
2. उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) लंबित
31 मार्च 2025 तक कई विभागों द्वारा खर्च की गई राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate) सरकार को नहीं दिया गया।
सबसे अधिक लंबित UC वाले विभाग:
पंचायत राज विभाग – ₹32,383 करोड़
शिक्षा विभाग – ₹19,097 करोड़
नगर विकास एवं आवास विभाग – ₹17,876 करोड़
ग्रामीण विकास विभाग – ₹6,419 करोड़
स्वास्थ्य विभाग – ₹3,037 करोड़
3. शिक्षा विभाग भी सूची में
लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्रों के मामले में शिक्षा विभाग दूसरे स्थान पर है। इससे विभागीय योजनाओं की निगरानी और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर प्रश्न खड़े होते हैं।
4. कागजों पर बनी परियोजनाएं
रिपोर्ट में उल्लेख है कि कुछ परियोजनाओं में बिना भूमि उपलब्ध हुए ही टेंडर जारी कर दिए गए।
कुछ योजनाएं 6 वर्षों तक शुरू नहीं हो सकीं।
कई परियोजनाएं निर्धारित समय के वर्षों बाद भी अधूरी रहीं।
करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला।
5. पुल बने, लेकिन सड़क नहीं
कुछ स्थानों पर पुलों का निर्माण हुआ, लेकिन उनसे जुड़ने वाली एप्रोच सड़कें नहीं बनीं। परिणामस्वरूप करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद परियोजनाएं उपयोगी नहीं बन सकीं।
6. मनरेगा और अन्य योजनाओं पर टिप्पणी
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि:
मनरेगा के लगभग 44% पद खाली रहे।
प्रशिक्षित मेट (सुपरवाइजर) के 75% पद रिक्त थे।
मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं मिला।
लोकपाल के पद लंबे समय तक खाली रहे।
CAG की प्रमुख सिफारिशें
योजना बनाने से पहले विस्तृत सर्वे कराया जाए।
भूमि उपलब्ध होने के बाद ही टेंडर जारी किए जाएं।
विकास परियोजनाओं की मजबूत मॉनिटरिंग हो।
सरकारी खर्च की नियमित निगरानी की जाए।
मनरेगा के रिक्त पद जल्द भरे जाएं।
नल-जल एवं अन्य बड़ी योजनाओं की स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था बनाई जाए।
निष्कर्ष
CAG रिपोर्ट यह संकेत देती है कि केवल बजट आवंटित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही आवश्यक है। रिपोर्ट में उठाए गए बिंदु वित्तीय अनुशासन, परियोजनाओं की गुणवत्ता और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर देते हैं।
> नोट: यह रिपोर्ट CAG में उल्लिखित तथ्यों और उपलब्ध समाचार विवरणों के आधार पर तैयार की गई है। अंतिम प्रशासनिक या कानूनी निष्कर्ष संबंधित सक्षम प्राधिकरण की जांच एवं कार्रवाई पर निर्भर करेंगे।



